दिवाली के बाद दिल्ली एक बार फिर धुंध और धुएं में लिपटी नजर आई। इस बार ‘ग्रीन पटाखों’ की अनुमति थी, लेकिन वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) फिर भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया। जानिए क्या ग्रीन पटाखे दिल्ली की हवा साफ़ करने में नाकाम रहे?
🏙️ दिल्ली में दिवाली के बाद फिर घना कोहरा — ‘हरी पटाखों’ के बावजूद AQI डाउन नहीं हुआ
दिवाली की रात दिल्ली की गलियां जगमगा उठीं, आसमान रंग-बिरंगी रौशनी से भर गया। मगर अगली सुबह वही पुराना नज़ारा – धुंध, धुआं और भारी हवा।
इस बार उम्मीद थी कि ‘ग्रीन पटाखे’ यानी कम प्रदूषण वाले आतिशबाज़ी के कारण हालात कुछ बेहतर होंगे। लेकिन आंकड़े कुछ और कहानी सुना रहे हैं।
🌫️ दिवाली के अगले दिन दिल्ली की हवा का हाल
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) और SAFAR की रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली के अगले दिन दिल्ली का औसत AQI 350 से ऊपर दर्ज हुआ — जो “बहुत खराब (Very Poor)” श्रेणी में आता है।
- आनंद विहार: AQI 360
- बवाना: 427 (Severe)
- वज़ीरपुर: 408 (Severe)
- जहांगीरपुरी: 407 (Severe)
- लोदी रोड: 322 (Very Poor)
दिल्ली के 38 में से 36 मॉनिटरिंग स्टेशन “लाल ज़ोन” में रहे। यानि, दिल्ली एक बार फिर देश की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी रही।
💥 क्या ग्रीन पटाखों से सच में कम प्रदूषण हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल “ग्रीन क्रैकर्स” के इस्तेमाल की इजाज़त दी थी, जो दावा करते हैं कि ये 30% कम प्रदूषण करते हैं।
पर विशेषज्ञों का कहना है कि जब कुल मिलाकर हवा पहले से ज़हरीली हो, तो 30% कमी का असर लगभग नगण्य रहता है।
🌀 क्यों नहीं सुधरी हवा?
1️⃣ मौसम का असर:
दिवाली के दौरान हवा की गति बहुत धीमी थी, जिससे धुआं और कण जमीन के पास ही फंसे रहे। ठंडक और नमी ने स्मॉग को और गाढ़ा बना दिया।
2️⃣ अन्य स्रोतों का योगदान:
. पराली जलाना (पंजाब, हरियाणा)
. वाहनों से निकलता धुआं
. निर्माण स्थलों की धूल
. डीज़ल जेनरेटर और औद्योगिक उत्सर्जन
3️⃣ समय सीमा का उल्लंघन:
हालांकि कोर्ट ने पटाखे सिर्फ रात 8 से 10 बजे तक जलाने की अनुमति दी थी, मगर कई इलाकों में आतिशबाज़ी आधी रात तक चली।
📉 पिछले सालों से तुलना
| वर्ष | दिवाली के अगले दिन AQI | श्रेणी | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 2021 | 454 | गंभीर (Severe) | पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद भारी प्रदूषण |
| 2022 | 315 | बहुत खराब | पराली और मौसम का असर |
| 2023 | 438 | गंभीर | बैन के बावजूद पटाखों का उपयोग |
| 2024 | 359 | बहुत खराब | ग्रीन पटाखे की शुरुआत |
| 2025 | 350+ | बहुत खराब | सुधार नहीं, वही पुराना हाल |
🌍 समाधान क्या है?
1. सख्त निगरानी: पटाखों के समय और बिक्री पर नियंत्रण जरूरी।
2. वैकल्पिक उत्सव: लेज़र शो, लाइट फेस्ट, समुदायिक सांस्कृतिक आयोजन जैसे विकल्प बढ़ाना।
3. सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहन: सड़कों पर निजी गाड़ियों की संख्या कम करना।
4. जनजागरूकता: बच्चों और युवाओं को प्रदूषण के असर और जिम्मेदारी के बारे में शिक्षित करना।
दिल्ली की हवा में इस बार भी बदलाव नहीं आया। ‘ग्रीन पटाखों’ की उम्मीद ने थोड़ी राहत का भरोसा तो दिया, मगर नतीजा वही रहा — धुआं, धुंध और सांसों पर बोझ।
अब वक्त है कि हम सिर्फ “कम ज़हर” की बात नहीं, बल्कि “बिना ज़हर” वाले समाधान की दिशा में सोचें।