रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को दो दिन की शिखर वार्ता के लिए भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। इस यात्रा के दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बड़े समझौतों की उम्मीद है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली पहुंचे, जहाँ उनकी दो-दिवसीय आधिकारिक यात्रा की शुरुआत हुई। यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि पुतिन लगभग तीन साल बाद भारत आए हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद यह उनकी भारत की पहली बड़ी यात्रा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस शिखर बैठक पर सभी देशों की नजरें टिकी हुई हैं।
जैसे ही पुतिन का विमान दिल्ली पहुंचा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच हुई गर्मजोशी भरी मुलाकात ने यह संकेत दिया कि भारत-रूस के रिश्तों में अभी भी वही भरोसा और निकटता बरकरार है। एयरपोर्ट से दोनों एक ही कार में प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहाँ अनौपचारिक बातचीत का दौर चला।
पुतिन का शेड्यूल और दिन भर का कार्यक्रम
पुतिन की इस यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम 5 दिसंबर से शुरू होता है। सुबह सबसे पहले राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। यह भारत के हर महत्वपूर्ण मेहमान के लिए पारंपरिक सम्मान का हिस्सा है।
उसके बाद सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम — भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन — दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित होगा। मोदी और पुतिन आमने-सामने बैठकर रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, एयरोस्पेस, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैज्ञानिक सहयोग पर विस्तृत चर्चा करेंगे। दोनों देशों के बीच कम से कम 8 से 10 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
भारत-रूस रिश्तों में इस यात्रा का महत्व
भारत और रूस के रिश्ते कई दशकों पुराने हैं। सोवियत दौर से लेकर आज तक, रूस भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है। भारत अपनी रक्षा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से पूरा करता है। इसलिए यह दौरा दोनों देशों के लिए भविष्य की दिशा तय करने जैसा है।
हाल के वर्षों में भारत ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से भी अपने रिश्ते मजबूत किए हैं, लेकिन रूस भारत की विदेश नीति का एक अहम स्तंभ बना हुआ है। इसलिए मोदी और पुतिन की यह मुलाकात यह संदेश देती है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है और सभी देशों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है।
कौन-कौन से मुद्दे चर्चा में रहेंगे?
1. रक्षा सहयोग:
भारत अभी भी S-400 जैसे आधुनिक हथियारों का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा फाइटर जेट्स, पनडुब्बियों और मैकेनिकल उपकरणों पर भी नई डील्स हो सकती हैं।
2. ऊर्जा और तेल:
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। पुतिन इस यात्रा के दौरान भारत को लंबी अवधि का तेल-गैस सप्लाई समझौता ऑफर कर सकते हैं।
3. व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर:
दोनों देशों का लक्ष्य है कि द्विपक्षीय व्यापार को अगले कुछ सालों में 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाए। भुगतान प्रणाली, लॉजिस्टिक रूट और व्यापार नियमों पर भी बातचीत होगी।
4. भू-राजनीतिक मुद्दे:
चीन, अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों के बीच भारत और रूस एक नई रणनीति बनाना चाहते हैं। एशिया में संतुलन, मल्टिपोलर वर्ल्ड और ग्लोबल सिक्योरिटी भी चर्चा में रहेंगे।
क्यों है यह यात्रा भारत के लिए अहम?
आज दुनिया तेजी से बदल रही है। बड़े देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में भारत के लिए यह जरूरी है कि वह अपने सभी प्रमुख साझेदारों के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखे। रूस न सिर्फ भारत का भरोसेमंद रक्षा आपूर्तिकर्ता है, बल्कि ऊर्जा, स्पेस, टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी भारत के साथ गहरी साझेदारी रखता है।
यह यात्रा भारत को यह मौका देती है कि वह रूस के साथ अपने रिश्तों को नए रूप में ढाले और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सहयोग बढ़ाए।
निष्कर्ष
पुतिन की भारत यात्रा सिर्फ एक औपचारिक इवेंट नहीं है — यह दोनों देशों के लिए आने वाले वर्षों की दिशा तय करने वाला बड़ा अवसर है। दुनिया जिस तरह बदल रही है, भारत और रूस की साझेदारी भी नई चुनौतियों और नए अवसरों के बीच खुद को अपडेट कर रही है।
इसलिए मोदी-पुतिन मुलाकात से निकलने वाले फैसले न सिर्फ भारत-रूस संबंधों को मजबूत करेंगे, बल्कि यूपीएसी, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और दुनिया की कूटनीतिक तस्वीर पर भी असर डालेंगे।